गीता आठवाँ अध्याय अर्थ सहित Bhagavad Gita Chapter – 8 with Hindi and English Translation

गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – १५

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् ।
नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥८-१५॥

-: हिंदी भावार्थ :-

परम सिद्धि को प्राप्त महात्माजन मुझको प्राप्त होकर दुःखों के घर एवं क्षणभंगुर पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होते॥15॥

-: English Meaning :-

Having attained to Me, they do not again attain birth, which is the seat of pain and is not eternal, they having reached highest perfection.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – १६

आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन ।
मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥८-१६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे अर्जुन! ब्रह्मलोकपर्यंत सब लोक पुनरावर्ती हैं, परन्तु हे कुन्तीपुत्र! मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता, क्योंकि मैं कालातीत हूँ और ये सब ब्रह्मादि के लोक काल द्वारा सीमित होने से अनित्य हैं॥16॥

-: English Meaning :-

(All) worlds including the world of Brahma are subject to returning again, O Arjuna; but, on reaching Me, O son of Kunti, there is no rebirth.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – १७

सहस्रयुगपर्यन्त महर्यद्ब्रह्मणो विदुः ।
रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥८-१७॥

-: हिंदी भावार्थ :-

ब्रह्मा का जो एक दिन है, उसको एक हजार चतुर्युगी तक की अवधि वाला और रात्रि को भी एक हजार चतुर्युगी तक की अवधि वाला जो पुरुष तत्व से जानते हैं, वे योगीजन काल के तत्व को जानने वाले हैं॥17॥

-: English Meaning :-

They – those people who know day and night – know that the day of Brahma is a thousand yugas long and the night is a thousand yugas long.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – १८

अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे ।
रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके ॥८-१८॥

-: हिंदी भावार्थ :-

संपूर्ण चराचर भूतगण ब्रह्मा के दिन के प्रवेश काल में अव्यक्त से अर्थात ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर से उत्पन्न होते हैं और ब्रह्मा की रात्रि के प्रवेशकाल में उस अव्यक्त नामक ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर में ही लीन हो जाते हैं॥18॥

-: English Meaning :-

From the Un-manifested all the manifestations proceed at the coming on of day; at the coming on of night they dissolve there only, in what is called the Un-manifested.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – १९

भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते ।
रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥८-१९॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे पार्थ! वही यह भूतसमुदाय उत्पन्न हो-होकर प्रकृति वश में हुआ रात्रि के प्रवेश काल में लीन होता है और दिन के प्रवेश काल में फिर उत्पन्न होता है॥19॥

-: English Meaning :-

This same multitude of beings having come into being again and again, is dissolved at the coming on of night, not of their will, O son of Pritha and comes forth at the coming on of day.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २०

परस्तस्मात्तु भावोऽन्यो ऽव्यक्तोऽव्यक्तात्सनातनः ।
यः स सर्वेषु भूतेषु नश्यत्सु न विनश्यति ॥८-२०॥

-: हिंदी भावार्थ :-

उस अव्यक्त से भी अति परे दूसरा अर्थात विलक्षण जो सनातन अव्यक्त भाव है, वह परम दिव्य पुरुष सब भूतों के नष्ट होने पर भी नष्ट नहीं होता॥20॥

-: English Meaning :-

But that other eternal Un-manifested Being, distinct from this Un-manifested (Avyakta) – He does not perish when all creatures perish.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २१

अव्यक्तोऽक्षर इत्युक्तस् तमाहुः परमां गतिम् ।
यं प्राप्य न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥८-२१॥

-: हिंदी भावार्थ :-

जो अव्यक्त ‘अक्षर’ इस नाम से कहा गया है, उसी अक्षर नामक अव्यक्त भाव को परमगति कहते हैं तथा जिस सनातन अव्यक्त भाव को प्राप्त होकर मनुष्य वापस नहीं आते, वह मेरा परम धाम है॥21॥

-: English Meaning :-

What is called the Un-manifested and the Imperishable, That, they say, is the highest goal; which having reached none return. That is My highest place.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २२

पुरुषः स परः पार्थ भक्त्या लभ्यस्त्वनन्यया ।
यस्यान्तःस्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम् ॥८-२२॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे पार्थ! जिस परमात्मा के अंतर्गत सर्वभूत है और जिस सच्चिदानन्दघन परमात्मा से यह समस्त जगत परिपूर्ण है , वह सनातन अव्यक्त परम पुरुष तो अनन्य भक्ति से ही प्राप्त होने योग्य है ॥22॥

-: English Meaning :-

Now, that Highest Purusha, O son of Pritha, within Whom all beings dwell, by Whom all this is pervaded, is attainable by exclusive devotion.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २३

यत्र काले त्वनावृत्ति मावृत्तिं चैव योगिनः ।
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥८-२३॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे अर्जुन! जिस काल में (यहाँ काल शब्द से मार्ग समझना चाहिए, क्योंकि आगे के श्लोकों में भगवान ने इसका नाम ‘सृति’, ‘गति’ ऐसा कहा है।) शरीर त्याग कर गए हुए योगीजन तो वापस न लौटने वाली गति को और जिस काल में गए हुए वापस लौटने वाली गति को ही प्राप्त होते हैं, उस काल को अर्थात दोनों मार्गों को कहूँगा॥23॥

-: English Meaning :-

Now, in what time departing, Yogins go to return not, as also to return, that time will I tell thee, O chief of the Bharatas.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २४

अग्निर्ज्योतिरहः शुक्लः षण्मासा उत्तरायणम् ।
तत्र प्रयाता गच्छन्ति ब्रह्म ब्रह्मविदो जनाः ॥८-२४॥

-: हिंदी भावार्थ :-

जिस मार्ग में ज्योतिर्मय अग्नि-अभिमानी देवता हैं, दिन का अभिमानी देवता है, शुक्ल पक्ष का अभिमानी देवता है और उत्तरायण के छः महीनों का अभिमानी देवता है, उस मार्ग में मरकर गए हुए ब्रह्मवेत्ता योगीजन उपयुक्त देवताओं द्वारा क्रम से ले जाए जाकर ब्रह्म को प्राप्त होते हैं। ॥24॥

-: English Meaning :-

Fire, light, day-time, the bright fortnight, the six months of the northern solstice – then departing, men who know Brahman reach Brahman.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २५

धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणायनम् ।
तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते ॥८-२५॥

-: हिंदी भावार्थ :-

जिस मार्ग में धूमाभिमानी देवता है, रात्रि अभिमानी देवता है तथा कृष्ण पक्ष का अभिमानी देवता है और दक्षिणायन के छः महीनों का अभिमानी देवता है, उस मार्ग में मरकर गया हुआ सकाम कर्म करने वाला योगी उपयुक्त देवताओं द्वारा क्रम से ले गया हुआ चंद्रमा की ज्योत को प्राप्त होकर स्वर्ग में अपने शुभ कर्मों का फल भोगकर वापस आता है॥25॥

-: English Meaning :-

Smoke, night-time and the dark fortnight, the six months of the southern solstice – attaining by these to the lunar light, the Yogin returns.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २६

शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते ।
एकया यात्यनावृत्ति मन्ययावर्तते पुनः ॥८-२६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

क्योंकि जगत के ये दो प्रकार के- शुक्ल और कृष्ण अर्थात देवयान और पितृयान मार्ग सनातन माने गए हैं। इनमें एक द्वारा गया हुआ (अर्थात इसी अध्याय के श्लोक 24 के अनुसार अर्चिमार्ग से गया हुआ योगी।)– जिससे वापस नहीं लौटना पड़ता, उस परमगति को प्राप्त होता है और दूसरे के द्वारा गया हुआ ( अर्थात इसी अध्याय के श्लोक 25 के अनुसार धूममार्ग से गया हुआ सकाम कर्मयोगी।) फिर वापस आता है अर्थात्‌ जन्म-मृत्यु को प्राप्त होता है॥26॥

-: English Meaning :-

These bright and dark Paths of the world are verily deemed eternal; by the one a man goes to return not, by the other he returns again.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २७

नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन ।
तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन ॥८-२७॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे पार्थ! इस प्रकार इन दोनों मार्गों को तत्त्व से जानकर कोई भी योगी मोहित नहीं होता। इस कारण हे अर्जुन! तू सब काल में समबुद्धि रूप से योग से युक्त हो अर्थात निरंतर मेरी प्राप्ति के लिए साधन करने वाला हो॥27॥

-: English Meaning :-

Knowing these paths, O son of Pritha, no Yogin is deluded; wherefore at all times be steadfast in Yoga, O Arjuna.


गीता आठवाँ अध्याय श्लोक – २८

वेदेषु यज्ञेषु तपःसु चैव दानेषु यत् पुण्यफलं प्रदिष्टम् ।
अत्येति तत्सर्वमिदं विदित्वा योगी परं स्थानमुपैति चाद्यम् ॥८-२८॥

-: हिंदी भावार्थ :-

योगी पुरुष इस रहस्य को तत्त्व से जानकर वेदों के पढ़ने में तथा यज्ञ, तप और दानादि के करने में जो पुण्यफल कहा है, उन सबको निःसंदेह उल्लंघन कर जाता है और सनातन परम पद को प्राप्त होता है॥28॥

-: English Meaning :-

Whatever fruit of merit is declared to accrue from the Vedas, sacrifices, austerities and gifts – beyond all this goes the Yogin on knowing this; and he attains to the Supreme Primeval Abode.


. गीता नवां अध्याय अर्थ सहित

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