गीता प्रथम अध्याय अर्थ सहित Bhagavad Gita Chapter 1 with Hindi and English Translation

अर्जुनविषादयोगः (अर्जुन विषादयोग) Disappointment of Arjun

गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १

-: धृतराष्ट्र उवाच :-
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय॥१-१॥

-: हिंदी भावार्थ :-

(सत् और असत् के विवेक रूपी नेत्रों से रहित,) धृतराष्ट्र बोले- (सत् और असत् के विवेक रूपी दिव्य नेत्रों वाले,) हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥१॥

-: English Meaning :-

(Devoid of eyes which can discriminate between right and wrong, hence blind) Dhrutarashtra asks: O Sanjay (with divine eyes for discrimination of right and wrong)! What are my sons and Pandavas, who are eager to fight, doing in the holy battle field of Kursukshethra?॥1॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २

संजय उवाच
दृष्टवा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्‌॥१-२॥

-: हिंदी भावार्थ :-

संजय बोले- उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूहरचनायुक्त पाण्डवों की सेना को देखा और द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहा॥२॥

-: English Meaning :-

Sanjay says: After seeing the orderly arranged army of Pandavas, Duryodhana approached his Guru Drona and said.॥2॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३

पश्यैतां पाण्डुपुत्राणा माचार्य महतीं चमूम्‌।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता॥१-३॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे आचार्य! आपके बुद्धिमान्‌ शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिए॥३॥

-: English Meaning :-

O Acharya! See this great army of the sons of Pandu, properly arranged by the son of Drupada and your intelligent disciple.॥3॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४

अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः॥१-४॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ५

धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्‌।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङवः॥१-५॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ६

युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्‌।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः॥१-६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

इस सेना में बड़े-बड़े धनुषों वाले तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान शूरवीर सात्यकि और विराट तथा महारथी राजा द्रुपद हैं। धृष्टकेतु और चेकितान तथा बलवान काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य, पराक्रमी युधामन्यु तथा बलवान उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र- ये सभी महारथी हैं॥4-6॥

-: English Meaning :-

In this army there are great warriors comparable to Bheem and Arjun, like Yuyudhana (Satyaki), Virata and Drupadha. Besides these, Drushtaketu, Chekitan, the mighty King of Kasi, Purujit Kunti Bhoj and the great among men Shaibya, very powerful Yudhamanyu and mighty Uttamouja, Subadhra ‘s son Abhimanyu and the five sons of Darupadi are all great warriors.॥4-6॥


महारथः-जो अकेला दस हजार धनुर्धारियों से युद्ध कर सकता हो और शस्त्र-शास्त्र विद्या में प्रवीण हो।

Maharatha: One who can fight with ten thousand archers alone and skilled in using all sorts of weapons.


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ७

अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम।
नायका मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते॥१-७॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान वीर हैं, उनको आप जान लीजिए। मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, आपकी जानकारी के लिए, उनको बतलाता हूँ॥7॥

-: English Meaning :-

O great among Brahmans! Our army also has great warriors which you should know. Let me list them for your knowledge.॥7॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ८

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च॥१-८॥

आप(द्रोणाचार्य) और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा॥8॥

You(Dronacharya),Bheeshma, Karna, war- winner Krupacharya,
Aswatthama, Vikarna and son of Soumadatta (Bhurishrawa)॥8॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ९

अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः॥१-९॥

-: हिंदी भावार्थ :-

और भी बहुत-से शूरवीर, जिन्होंने मेरे लिए अपने जीवन की आशा त्याग दी है, अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित और सभी युद्ध में कुशल हैं॥9॥

-: English Meaning :-

There are many more warriors, ready to sacrifice their lives for my sake and they are well armed and experts in war.॥9॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १०

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्‌।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्‌ ॥१-१०॥

-: हिंदी भावार्थ :-

भीष्म पितामह द्वारा रक्षित हमारा सैन्य बल पर्याप्त नहीं है और भीम द्वारा रक्षित इन लोगों का यह सैन्य बल पर्याप्त(अधिक) है॥10॥

-: English Meaning :-

Our army, led by Bheeshma is of inadequate strength and the strength of their army is adequate, due to its protection by Bheem.॥10॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ११

अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि॥१-११॥

-: हिंदी भावार्थ :-

इसलिए सब मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह स्थित रहते हुए आप सभी लोग भीष्म पितामह की ही सब ओर से रक्षा करें॥11॥

-: English Meaning :-

So all of you, staying at your respective places with your army must protect Bheeshma from all the sides.॥11॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १२

तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शंख दध्मो प्रतापवान्‌॥१-१२॥

-: हिंदी भावार्थ :-

उस दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए, कौरवों में श्रेष्ठ, प्रतापी पितामह भीष्म ने उच्च स्वर से सिंहनाद करते हुए शंख बजाया॥12॥

-: English Meaning :-

Then to please Duryodhan, the mighty Bheeshma, eminent among Kuru clan, roaring like a lion, blew his conch.॥12॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १३

ततः शंखाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्‌॥१-१३॥

-: हिंदी भावार्थ :-

तब शंख और नगाड़े, ढोल, मृदंग और नरसिंघे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ॥13॥

-: English Meaning :-

Then, several conchs, drums, cymbals and gongs, blew together in unison which produced great sound.॥13॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १४

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥१-१४॥

-: हिंदी भावार्थ :-

इसके पश्चात् सफेद घोड़ों वाले उत्तम रथ में बैठे हुए भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाए॥14॥

-: English Meaning :-

After that Lord Krishna and Arjuna also blew their divine conches, while sitting on a great chariot drawn by white horses.॥14॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १५

पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशंख भीमकर्मा वृकोदरः॥१-१५॥

-: हिंदी भावार्थ :-

भगवान श्रीकृष्ण ने पाञ्चजन्य, अर्जुन ने देवदत्त और भयानक कर्म वाले भीमसेन ने पौण्ड्रं नाम वाला महाशंख बजाया॥15॥

-: English Meaning :-

Lord Krishna blew his conch Panchajanya, Arjun blew his conch Devadatta and tremendously mighty, Bheem blew his great conch Poundram.॥15॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १६

अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥१-१६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय और नकुल-सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नाम वाले शंख बजाए॥16॥

-: English Meaning :-

The king Yudhishthira, son of Kunti, blew his conch Ananta Vijaya, Nakul, his conch Sughosha and Sahadev, his conch Mani Pushpaka.॥16॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १७

काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥१-१७॥

गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १८

द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते।
सौभद्रश्च महाबाहुः शंखान्दध्मुः पृथक्पृथक्‌॥१-१८॥

हे राजन्‌! श्रेष्ठ धनुष वाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टद्युम्न, राजा विराट और अजेय सात्यकि, द्रुपद एवं द्रौपदी के पांचों पुत्र और बड़ी भुजाओं वाले सुभद्रा-पुत्र अभिमन्यु ने, पूरी तरह से अपने-अपने शंख बजाए॥17-18॥

O king! The great archer Kashya, great charioteer Shikhandi,
Dhrushtadhyumna, Virat, invincible Satyaki, Drupad, all sons of Draupadi, mighty Abhimanyu, son of Subadhra blew their conchs separately with full vigour.॥17-18॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – १९

स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्‌।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्‌॥१-१९॥

-: हिंदी भावार्थ :-

उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुंजाते हुए धृतराष्ट्र के पुत्रों के हृदय विदीर्ण कर दिए॥19॥

-: English Meaning :-

That great sound through multiple resonance in earth and sky, shattered the hearts of the sons of Dhrutarashtra.॥19॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २०

अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्‌ कपिध्वजः।
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः॥१-२०॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २१

हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते।
अर्जुन उवाच
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत॥१-२१॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे राजन्‌! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने धृतराष्ट्र-संबंधियों को व्यूह में स्थित होकर शस्त्र चलाने के लिए तैयार देखकर धनुष उठाकर सबके हृदय के स्वामी भगवान श्रीकृष्ण से यह वचन कहा- हे अच्युत! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिए॥20-21॥

-: English Meaning :-

O king! Then, seeing your army well arranged and ready for battle with weapons, Arjun, with Sri Hanuman in his flag, lifted his bow and told infallible Lord Krishna, controller of everyone’s heart – Please take this chariot in the middle of two armies॥20 -21॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २२

यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्‌।
कैर्मया सह योद्धव्यम स्मिन् रणसमुद्यमे॥१-२२॥

-: हिंदी भावार्थ :-

और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में स्थित इन विपक्षी योद्धाओं का निरीक्षण न कर लूँ कि इस युद्ध में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है॥22॥

-: English Meaning :-

Till I observe all these warriors ready for the battle and decide whom I should fight myself.॥22॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २३

योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धे र्युद्धे प्रियचिकीर्षवः॥१-२३॥

-: हिंदी भावार्थ :-

दुर्बुद्धि दुर्योधन का युद्ध में प्रिय चाहने वाले जो राजा युद्ध की इच्छा से इस सेना में आए हैं, उनको मैं देखना चाहूँगा॥23॥

-: English Meaning :-

I want to see these Kings who have come here to help evil minded Duryodhan, with a wish to fight against us.॥23॥

संजय उवाच
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत।
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्‌॥१-२४॥

भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्‌।
उवाच पार्थ पश्यैतान्‌ समवेतान्‌ कुरूनिति॥१-२५॥

संजय बोले – अर्जुन के द्वारा इस प्रकार कहे जाने पर भगवान श्रीकृष्ण ने दोनों सेनाओं के बीच में उस उत्तम रथ को खड़ा कर दिया और कहा – हे पार्थ! युद्ध के लिए एकत्रित हुए इन कौरवों, प्रमुख रूप से भीष्म और द्रोणाचार्य तथा सम्पूर्ण राजाओं को देखो॥24-25॥

Sanjay said: The Lord Krishna, when told like this by Arjuna,
positioned the chariot in the middle of the armies and told him – O Parth, see these great warriors of Kuru clan mainly Bheeshma and Drona and all other kings.॥24-25॥

गुडाकेश-(मोह) निद्रा को जीतने वाला) अर्थात् अर्जुन हृषीकेश-सबके शरीर के मध्य, हृदय में स्थित और उसके स्वामी श्रीकृष्ण

Gudakesh – One who has control over his sleep(of delusion), here Arjun.
Hrushikesh – Present in heart(middle portion of body) of everyone, here or anywhere Lord Sri Krishna.


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २६

तत्रापश्यत्स्थितान्‌ पार्थः पितृनथ पितामहान्‌।
आचार्यान्मातुलान्भ्रातृन् पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा॥१-२६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

इसके बाद पृथापुत्र अर्जुन ने उन दोनों ही सेनाओं में स्थित पिता(ताऊ-चाचा), पितामह, आचार्य, मामा, भाई, पुत्र, पौत्र, मित्र, ससुर और सुहृदों को देखा॥26-27॥

-: English Meaning :-

Then Arjun saw his uncles, grand father, teachers, maternal uncle, brothers, sons and grand sons, in-laws and well-wishers in both the armies.॥26॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २७

श्वशुरान्‌ सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि।
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्‌ बन्धूनवस्थितान्‌॥१-२७॥

-: हिंदी भावार्थ :-

उपस्थित उन सभी बंधुओं को देखकर वे कुंतीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणा-युक्त होकर शोक करते हुए यह बोले -॥27-28॥

-: English Meaning :-

Seeing his relatives all over there, Arjuna felt compassion and became sad. He said-॥27-28॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २८

अर्जुन उवाच
कृपया परयाविष्टो विषीदत्रिदमब्रवीत्‌।
दृष्टेवमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्‌॥१-२८॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – २९

सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते॥१-२९॥

-: हिंदी भावार्थ :-

अर्जुन बोले- हे कृष्ण! यहाँ मैं युद्ध के अभिलाषी स्वजनों को ही देखता हूँ। मेरे अंग शिथिल हुए हो रहे हैं और मुख सूख रहा है और मेरे शरीर में मेरा शरीर काँप रहा है और रोएं खड़े हो रहे हैं॥28-29॥

-: English Meaning :-

Arjun said – O Krishna! I only see my relatives here, wishing to fight us. My body is becoming weak, mouth dry, my body is trembling with hair erect.॥28-29॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३०

गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्वक्चैव परिदह्यते।
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः॥१-३०॥

-: हिंदी भावार्थ :-

मेरे हाथ से गांडीव धनुष गिर रहा है और मेरी त्वचा जल रही है। मैं खड़ा रहने में भी असमर्थ हो रहा हूँ, मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है॥30॥

-: English Meaning :-

My bow, Gandeev is slipping from my hand and skin is burning. I am not able to even stand erect, my mind is swirling.॥30॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३१

निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव।
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे॥१-३१॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे केशव! मैं लक्षणों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ और युद्ध में स्वजनों को मारकर किसी प्रकार से कल्याण भी नहीं देखता॥31॥

-: English Meaning :-

O Keshav! I am seeing signs of bad omens only and do not see any gain in killing these relatives.॥31॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३२

न काङ्‍क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च।
किं नो राज्येन गोविंद किं भोगैर्जीवितेन वा॥१-३२॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे कृष्ण! मैं न तो विजय चाहता हूँ और न राज्य तथा सुखों को ही। हे गोविंद! हमें ऐसे राज्य, भोग और जीवन से क्या लाभ है?॥32॥

-: English Meaning :-

O Krishna! I do not desire victory or kingdom or sensory pleasures. O Govind! what is the use in having such kingdom, pleasures and life?॥32॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३३

येषामर्थे काङक्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च।
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च॥१-३३॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हमें जिनके लिए राज्य, भोग और सुखादि अभीष्ट हैं, वे ही सब धन और जीवन की आशा को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं॥33॥

-: English Meaning :-

The same people for whom, we desire kingdom, pleasures and happiness are here to fight with us keeping aside all the hopes of life and money.॥33॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३४

आचार्याः पितरः पुत्रास् तथैव च पितामहाः।
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः संबंधिनस्तथा॥१-३४॥

-: हिंदी भावार्थ :-

आचार्यगण, पिता(ताऊ-चाचा), पुत्र और पितामह, और मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा और भी संबंधी॥34॥

-: English Meaning :-

Teachers, uncles, sons, grand-father, maternal uncles, in laws, grand-sons, brothers in law and all other relatives.॥34॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३५

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते॥१-३५॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे मधुसूदन! इनके द्वारा मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिए भी मैं इन सबको नहीं मारना चाहता, फिर पृथ्वी के लिए तो बात ही क्या है?॥35॥

-: English Meaning :-

O killer of Madhu! Even if they try to kill me or I am becoming the king of the three worlds on doing so, I am not interested in killing them. Then why for this trivial kingdom of earth.॥35॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३६

निहत्य धार्तराष्ट्रान्न का प्रीतिः स्याज्जनार्दन।
पापमेवाश्रयेदस्मान्‌ हत्वैतानाततायिनः॥१-३६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा॥36॥

-: English Meaning :-

O Janardan! What happiness will we achieve by killing these sons of Dhrutarashtra? On killing these aggressors, only sin will get attached to us.॥36॥

आग लगाने वाला, विष देने वाला, हाथ में शस्त्र लिए हुए, धन छीनने वाला, जमीन अथवा पत्नी का हरण करने वाला इन छः कार्यों को करने वालों को आततायी कहा गया है।
नीति शास्त्र के अनुसार सभी आततायी वध के योग्य हैं, उनका वध बिना विचार किये किया जा सकता है और उनके वध में कोई दोष नहीं है।

These six are said aggressors(aattayi) – who sets you or your belongings on fire, giver of poison, having weapons in his hand for the purpose of killing, snatcher of money, abductor of land or wife.
As per policy of ethics such aggressors should be killed, they should be killed without much thought and there is no fault in doing so.


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३७

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्‌।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव॥१-३७॥

-: हिंदी भावार्थ :-

इसलिए हे माधव! हमारे लिए अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र-पुत्रों को मारना उचित नहीं हैं क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?॥37॥

-: English Meaning :-

O Madhav!, So it is not proper for us to kill our relatives, the sons of Dhrutarashtra. How can we please ourselves by killing our relatives ?॥37॥

यद्यपि नीति की दृष्टि से आततायियों को मारने में कोई दोष नहीं है परन्तु धर्म की दृष्टि से इनकी सेना में उपस्थित पितामह और आचार्य आदि का वध करना दोषमय है।
धर्मं नीति से प्रबल है इसलिए हमें ऐसा नहीं करना चाहिए।

As per law, there is no fault in killing these aggressors but according to Dharma, it is sinful to kill grand-father Bheeshma, teacher Drona, etc who are present in their army. As religion is far superior than law, we should not do these killings.


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३८

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः।
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम्‌॥१-३८॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ३९

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्‌।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन॥१-३९॥

-: हिंदी भावार्थ :-

यद्यपि लोभ से भ्रष्ट-चित्त हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते हैं, तो भी हे जनार्दन! कुल के नाश से उत्पन्न दोष को जानने वाले हम लोगों को इस पाप से बचने के लिए क्यों नहीं प्रयत्न करना चाहिए?॥38-39॥

-: English Meaning :-

Though, due to their increased greed they they do not see the demerit in destroying the their dynasty and fighting with their friends, but O Janardan! we, who know the sin in destruction of dynasty should try to avoid committing such a sin.॥38-39॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४०

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नम धर्मोऽभिभवत्युत॥१-४०॥

-: हिंदी भावार्थ :-

कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं और धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में अधर्म बढ़ जाता है॥40॥

-: English Meaning :-

When dynasties are destroyed, their traditional righteousness and just rituals also get destroyed. And due to the downfall of righteousness, injustice tends to grow.॥40॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४१

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः॥१-४१॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे कृष्ण! अधर्म के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है॥41॥

-: English Meaning :-

O Krishna! When injustice grows, women of the clan lose their sanctity. O Varshneya! And when women lose their sanctity, kids with a mixture of the castes take birth.॥41॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४२

संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च।
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः॥१-४२॥

-: हिंदी भावार्थ :-

वह वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिए ही होता है। पिण्ड और जल-दान की क्रिया(अर्थात् श्राद्ध और तर्पण) से वंचित उनके पितर भी अधोगति को प्राप्त होते हैं॥42॥

-: English Meaning :-

Such mixed-caste kid leads the dynasties and their destroyers to hell. Even their ancestors fall from their place due to discontinuities in the rituals performed for them. ॥42॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४३

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः॥१-४३॥

-: हिंदी भावार्थ :-

वर्ण-संकरता के कारण होने वाले इन दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं॥43॥

-: English Meaning :-

Defects of mixed-caste causes these destroyer of dynasties to lose their traditional righteousness of dynasty and caste. ॥43॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४४

उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम॥१-४४॥

-: हिंदी भावार्थ :-

हे जनार्दन! और ऐसा हम सुनते आये हैं कि नष्ट कुल-धर्म वाले मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है॥44॥

-: English Meaning :-

O Janardan!, We have heard that those who destroy the righteousness of their dynasty live in hell for indefinitely long time.॥44॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४५

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्‌।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः॥१-४५॥

-: हिंदी भावार्थ :-

अरे बड़े दुर्भाग्य की बात है कि हम लोग राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने रूपी महान पाप करने को भी उद्यत हैं॥45॥

-: English Meaning :-

Alas! We are ready to commit a great sin by killing our own people for the greed of kingdom and pleasure.॥45॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ४६

यदि मामप्रतीकारम शस्त्रं शस्त्रपाणयः।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस् तन्मे क्षेमतरं भवेत्‌॥१-४६॥

-: हिंदी भावार्थ :-

यदि मुझ सामना न करने वाले और शस्त्ररहित को शस्त्र लिए हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मेरे लिए अधिक कल्याण कारी होगा॥46॥

-: English Meaning :-

Even if the armed sons of Dhrutarashtra kill me, who is not willing to fight and unarmed, it would be better for my well-being.॥46॥


गीता प्रथम अध्याय श्लोक – ५७

संजय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः सङ्‍ख्ये रथोपस्थ उपाविशत्‌।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः॥१-४७॥

-: हिंदी भावार्थ :-

संजय बोले – इस प्रकार कहकर, रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाले अर्जुन, बाण सहित धनुष को त्याग कर रथ के पिछले भाग में बैठ गए॥47॥

-: English Meaning :-

Sanjay said – After saying this, a visibly dejected Arjuna gave up his bows along with arrows and sat at the back of his chariot.॥47॥


आत्मज्ञानी गुरु अपने समक्ष बैठे हुए श्रद्धावान और योग्य शिष्य को उसकी मानसिक शांति के लिए ब्रह्म प्राप्ति रूप उपनिषत् का उपदेश करते हैं।
यहाँ साक्षात् वासुदेव श्रीकृष्ण स्वयं गुरु हैं और श्रीअर्जुन उनके शिष्य।
कपिध्वज अर्जुन की उत्कृष्ट योग्यता के कारण स्वयं भगवान ही उनको यह उपदेश दे रहे हैं।
श्रीहनुमान् बल, बुद्धि, भक्ति इत्यादि सद्गुणों में सबसे वरिष्ठ माने गए हैं, उनको अपनी ध्वजा में धारण करने वाले श्रीअर्जुन को साधकों में श्रेष्ठ समझना चाहिए।
गीता के उपदेशक, उपदेश सुनने वाले, विषय, परिस्थिति आदि सभी विशिष्ट हैं इसलिए इसको समस्त उपनिषदों में श्रेष्ठ और उनका सार-स्वरुप माना गया है।

Enlightened guru preach their disciple, who sits in front of him and is reverent and worthy, for his mental peace. This instruction lets him attain realization of Ultimate and is called Upanishat. Here Lord Sri Krishna himself as a guru is directly instructing his disciple Sri Arjun. Due to exemplary excellence of Arjun, with Sri Hanuman on his flag, Lord Sri Krishna is imparting this knowledge directly to him. Sri Hanuman is considered the best in all the good qualities like power, intelligence, devotion and what not. So, Arjun who has him on top of his chariot is also considered the best among seekers. In Gita, instructor, disciple, content, situation, etc. everything is distinguished so it is considered the best among Upanishads and their essence.


गीता द्वितीय अध्याय अर्थ सहित

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