एलोपैथी, आयुर्वेद एवं होमियोपैथी चिकित्सा पद्धतियों में अंतर

स्वास्थ्य मानव जीवन का सबसे जरूरी पहलू है। एक स्वस्थ जीवन खुशहाली का सबसे मूल आधार है। हालाँकि, जब किसी इंसान का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और वह बीमार पड़ता है, तो उसे अपने इलाज के लिए एक चिकित्सक की ज़रूरत होती है। आधुनिक दुनिया में, किसी बीमारी के इलाज के लिए सबसे पहले जो चिकित्सा पद्धति दिमाग में आती है, वह है एलोपैथी या आधुनिक चिकित्सा पद्धति। लेकिन बीमारी के इलाज के लिए एलोपैथी अकेला सिस्टम नहीं है।

लेकिन एलोपैथी के अलावा हमारे देश में कुछ और चिकित्सा पद्धतियां है जो बीमारी का इलाज प्राकृतिक और सौम्य तरीके से कर सकती है। आयुर्वेद और होम्योपैथी भारत में मौजूद ऐसी ही 2 प्रसिद्ध अल्टरनेटिव मेडिसिन पद्धतियां है जिन पर करोड़ो लोग भरोसा करते है।

हालांकि यह सोचना गलत है कि कोई एक पद्धति किसी दूसरे से बेहतर या ख़राब है। ये सभी समग्र चिकित्सा का हिस्सा हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं। इस लेख में, हम भारत में प्रसिद्ध इन 3 चिकित्सा पद्धतियों की आम जानकारी और रेगुलेशन स्टेटस के बारे में बात करेंगे।

एलोपैथी (कन्वेंशनल मेडिसिन)

एलोपैथी या आधुनिक चिकित्सा पद्धति (कन्वेंशनल मेडिसिन) भारत एवं विश्व में सबसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा पद्धति हैं। इलाज का यह तरीका पूरे भारत में सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में आसानी से उपलब्ध है।

एलोपैथी में इलाज का तरीका:

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में बीमारी के इलाज के लिए आधुनिक दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। ये दवाइयां शोध पर आधारित होती हैं, और सरकारी एजेंसियां लम्बी टेस्टिंग के बाद ही इन दवाइयों को मंज़ूरी देती हैं। ये दवाइयां केमिकल कंपाउंड से लैब में तैयार की जाती हैं या पौधों, जानवरों, फंगस, या यौगिक पदार्थ आदि से तैयार की जाती हैं।

दवाओं के अलावा, एलोपैथी में बीमारियों के इलाज के लिए शल्य चिकित्सा (surgical procedures) भी शामिल हैं। स्वास्थय की आपात स्थिति में एलोपैथी ही सबसे कारगर चिकित्सा पद्धति है।

एलोपैथी डॉक्टरों की क्वालिफिकेशन:

भारत में एलोपैथी डॉक्टर के तौर पर काम करने के लिए, किसी व्यक्ति के पास कम से कम MBBS (Bachelor of Medicine, Bachelor of Surgery) की डिग्री होना अनिवार्य है। MBBS, 5.5 साल का कोर्स है जिसमें छात्र 4.5 साल की पढ़ाई और क्लिनिकल लर्निंग और 1 साल की ज़रूरी इंटर्नशिप करते हैं। MBBS के बाद, डॉक्टर स्पेशलाइज़ेशन के लिए हायर डिग्री और डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं।

भारत में एलोपैथी डॉक्टरों का रेगुलेशन:

भारत में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) एलोपैथी डॉक्टरों को रेगुलेट करती है। यह एलोपैथी मेडिकल प्रैक्टिशनर्स को रजिस्ट्रेशन देती है और मेडिकल प्रैक्टिस को मॉनिटर करती है, और भारत में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का मूल्यांकन करती है। NMC भारत में उन नकली मेडिकल प्रैक्टिशनर्स पर भी रोक लगाता है जो बिना ज़रूरी क्वालिफिकेशन के प्रैक्टिस करते हैं। NMC सितंबर 2020 में बनाया गया था। NMC से पहले मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (MCI) यह कार्य किया करती थी।

एलोपैथी डॉक्टर से कैसे कंसल्ट करें:

एलोपैथी डॉक्टर से कंसल्ट करने के लिए, आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में जा सकते हैं। सरकारी अस्पताल कई स्तर के होते हैं, जैसे PHC (प्राइमरी हेल्थ सेंटर), CHC (कम्युनिटी हेल्थ सेंटर), डिस्ट्रिक्ट अस्पताल (DH), और मेडिकल कॉलेज जो एलोपैथी चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं। इन सरकारी अस्पताल के अलावा, पूरे भारत में प्राइवेट अस्पताल और हेल्थकेयर सेंटर भी हैं।

इन अस्पतालों के अलावा आप Practo, Lybrate जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए भी एलोपैथी डॉक्टर से परामर्श एवं उपचार ले सकते हैं।

आयुर्वेद

आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति प्राचीन भारतीय औषधियों के ज्ञान पर आधारित है। यह पद्धति 5000 वर्षो से भी ज्यादा पुरानी है जिसकी शुरूआत प्राचीन भारतीय ऋषियों ने की थी। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथो ने इस अमूल्य ज्ञान को आधुनिक पीढ़ियों तक पहुंचाया है। यह चिकित्सा पद्धति पुराने समय से भारतीय घरों में इस्तेमाल होती आ रही है। प्राचीन ज्ञान के अलावा, आयुर्वेद में लगातार नई रिसर्च हो भी रही हैं।

आयुर्वेद में इलाज का तरीका:

आयुर्वेद सिर्फ़ एक चिकित्सा पद्धति नहीं है बल्कि यह प्रकृति के साथ सामंजस्य में स्वस्थ जीवन जीने का पूर्ण दर्शन है। आयुर्वेद स्वस्थ जीवन के लिए मन, शरीर और आत्मा के बीच संपूर्ण संतुलन की बात करता है। आयुर्वेद का मानना है कि हमारा स्वस्थ्य तीन दोषों यानी वात, पित्त और कफ के बीच संतुलन का नतीजा है एवं इन तीन दोषों में असंतुलन से ही रोगों का जन्म होता है। रोग को दूर करने के लिए एवं शरीर को फिर से स्वस्थ्य बनाने के लिए इन तीन दोषो में संतुलन आवश्यक है। बीमारी की अवस्था में आयुर्वेदिक औषधियां इन्ही तीन दोषो को संतुलित करने का काम करती हैं।

आयुर्वेदिक दवाएँ पौधों, जानवरों, एवं प्राकृतिक पदार्थो से बनाई जाती हैं। दवाइयों के अलावा, आयुर्वेद में शरीर के शुद्धीकरण, ऊर्जा, और स्वस्थ्य लाभ के लिए कई तरह की क्रियाएँ भी की जाती हैं।

आयुर्वेदिक डॉक्टरों की क्वालिफिकेशन:

भारत में आयुर्वेदिक डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए, BAMS (बैचलर ऑफ़ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री होना अनिवार्य है। BAMS एक 5.5 साल का कोर्स है जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और क्लिनिकल ज्ञान और 1 साल की ज़रूरी इंटर्नशिप शामिल होती है।

भारत में आयुर्वेदिक डॉक्टरों का रेगुलेशन:

भारत में आयुर्वेदिक मेडिसिन सिस्टम को नियंत्रित एवं नियमित करने का काम नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन (NCISM) द्वारा किया जाता है। यह कमीशन आयुष मंत्रालय के तहत आता है। NCISM भारतीय मेडिसिन सिस्टम से जुड़े इंस्टीट्यूशन के लिए पॉलिसी बनाता है और इस मेडिसिन सिस्टम में मेडिकल प्रोफेशनल को रेगुलेट करता है।

आयुर्वेदिक डॉक्टर से कैसे सलाह लें:

आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लेने के लिए, आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट आयुर्वेदिक हेल्थकेयर सेंटर पर जा सकते हैं। अलग-अलग लेवल पर सरकारी आयुर्वेदिक हेल्थकेयर सेंटर हैं। इसके अलावा, सरकार रेगुलर सरकारी अस्पतालों में भी आयुर्वेदिक डॉक्टरों को नियुक्त करती है।

होम्योपैथी

होमियोपैथी भारत एवं दुनिया भर में मानी जाने वाली एक मशहूर अल्टरनेटिव चिकित्सा पद्धति है। इसकी शुरुवात 18वीं सदी जर्मनी में एक डॉक्टर सैमुअल हैनीमैन द्वारा की गई थी। लेकिन जल्द ही यह अपने सौम्य और होलिस्टिक इलाज के तरीकों की वजह से दुनिया भर में विख्यात हो गई। होम्योपैथी ‘लाइक क्योर लाइक’ के सिद्धांत पर आधारित है।

होम्योपैथी का उपयोग लम्बे समय से चले आ रहे जीर्ण रोगों के उपचार में काफी प्रभावी रूप से किया जाता है। यह गुर्दे की पथरी, बवासीर, माइग्रेन सिरदर्द, त्वचा रोग, जोड़ों का दर्द, एलर्जी, सेक्सुअल शिकायतें, पेट सम्बन्धी समस्याओं और कई दूसरी लंबे समय से चली आ रही पुरानी बीमारियों के इलाज में प्रभावी है।

होम्योपैथी में इलाज का तरीका:

होम्योपैथी उपचार पद्धति एक होलिस्टिक अप्रोच पर काम करती है। यानी, एक होम्योपैथी डॉक्टर मरीज़ के सभी पहलुओ पर ध्यान देता है, जैसे उसकी बीमारी के लक्षण, उसकी जीवनशैली, उसकी स्वास्थ्य स्थिति, उसकी मानसिक एवं शारीरिक अवस्था, मरीज का व्यक्तिगत व्यवहार इत्यादि।

होम्योपैथी डॉक्टर मरीज़ के सभी मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक लक्षणों के साथ-साथ उसके पहले की बीमारीयों और फैमिली हिस्ट्री के बारे में भी पूछते है। इन सभी लक्षणों को इकट्ठा करने के बाद इन लक्षणों के आधार पर वह मरीज़ के लिए सही दवा चुनते है।

होमियोपैथी दवाएं मरीज के लक्षणों के आधार पर बदल जाती हैं यही कारण है की एक ही बीमारी के लिए 2 अलग-अलग मरीज़ों की उनके लक्षणों के आधार पर 2 अलग-अलग दवाएँ हो सकती हैं। होमियोपैथी इंडिविजुअलाइज़ेशन (individualization) के सिद्धांत पर काम करती है यही कारण है की होमियोपैथी डॉक्टर हर मरीज के लक्षणों का नए सिरे से आकलन करते है एवं उसके लक्षणों के आधार पर उसकी उस वर्तमान बीमारी के लिए सही दवा का चुनाव करते है। दूसरे चिकित्सा पद्धतियों की तरह होमियोपैथी में किसी खास बीमारी के लिए कोई तय होम्योपैथी दवाएँ नहीं होतीं बल्कि यह मरीज के लक्षणों पर निर्भर करती है। यही वजह है कि होम्योपैथिक इलाज का असर काफी हद तक होम्योपैथिक डॉक्टर की कुशलता पर निर्भर करता है।

होमियोपैथी दूसरे चिकित्सा पद्धतियों के तुलना में ज्यादा सस्ता है एवं होमियोपैथी दवाओं का साइड इफ़ेक्ट भी दूसरे चिकित्सा पद्धतियों के तुलना में बहुत काम है।

होम्योपैथिक डॉक्टरों की क्वालिफिकेशन:

भारत में होम्योपैथिक डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने के लिए, आपके पास BHMS (बैचलर ऑफ़ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) की डिग्री होनी चाहिए। BHMS 5.5 साल का कोर्स है जिसमें 4.5 साल की पढ़ाई और क्लिनिकल लर्निंग और 1 साल की ज़रूरी इंटर्नशिप होती है।

भारत में होम्योपैथिक डॉक्टरों का रेगुलेशन:

नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी (NCH) भारत में होम्योपैथिक मेडिसिन सिस्टम को कंट्रोल और रेगुलेट करता है। NCH, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत एक कानूनी संस्था है।

NCH का काम होम्योपैथी शिक्षा का स्टैंडर्ड बनाए रखना और प्रैक्टिस में नैतिकता बनाए रखना है। NCH के अलावा, होम्योपैथी रेगुलेशन के लिए हर राज्य में मेडिकल काउंसिल हैं, जो राज्य में डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन, लोकल एनफोर्समेंट, और NCH नियमो का सही अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए के लिए ज़िम्मेदार हैं।

होम्योपैथिक डॉक्टर से कैसे सलाह लें:

होम्योपैथिक डॉक्टर से सलाह लेने के लिए, आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट होम्योपैथिक क्लिनिक में जा सकते हैं। अलग-अलग लेवल पर सरकारी होम्योपैथिक क्लिनिक हैं। साथ ही, कई राज्य सरकारें रेगुलर सरकारी अस्पतालों में भी होम्योपैथिक डॉक्टरों की नियुक्ति करती हैं।

इसके अलावा आप कई प्लेटफॉर्मो जैसे ConsultHomeo से भी घर बैठे ऑनलाइन होमियोपैथी उपचार एवं परामर्श ले सकते हैं एवं अपने घर के पते पर दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी भारत में बड़े पैमाने पर अपनाई जाने वाली लोकप्रिय चिकित्सा प्रणालियाँ हैं। इन तीनों ही पद्धतियों में मरीज का उपचार करने के लिए अलग अलग तरीके अपनाये जाते हैं। ये तीनों ही पद्धतियां भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है एवं अलग अलग सरकारी संस्थाए इन चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टरों एवं इनकी शिक्षा की गुणवत्ता को बनाये रखने का काम करती हैं। यह कहना पूरी तरह सही नहीं है की कोई एक चिकित्सा पद्धति किसी दूसरे से बेहतर या ख़राब है बल्कि यह तीनों ही पद्धतियां एक दूसरे की पूरक हैं।

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